हिन्दुस्तानियों में जिंक की कमी दूर करने को एएएमयू प्रोफेसर का शोध
जिंक व बैक्टीरिया की मदद से मिश्रण बनाकर गेहूं की फसल में मिलाया
सामान्य गेहूं में 4.5 मिली ग्राम होता जिंक, शोध में 7.79 तक बढ़ाई मात्रा
शोध द्वारा उत्पादित गेहूं का चूहे पर किया परीक्षण, उसमें बढ़ा आया जिंक
शोध को एमएचआरडी और स्पार्क द्वारा मिला था 74 लाख रुपये का फंड
अलीगढ़ । देश की बड़ी आबादी में जिंक की भारी कमी दर्ज की जा रही है। विश्व में प्रत्येक वर्ष 4.50 फीसदी बच्चे जिंक की कमी से अकाल मृत्यु के शिकार हा जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए एएमयू प्रोफेसर ने बायो फोर्टिफिकेशन विधि की खोज की है। जिससे फसलों में जिंक की मात्रा और फसल की पैदावार दोनों को दो गुना किया जा सकता है।
आमतौर पर बुआई के समय खेतों में जिंक का प्रयोग किया जाता है। जिससे फसलों में जिंक की मात्रा को बढ़ाया जा सके। पर वह जिंक मिट्टी में अच्छी तरह घुल नहीं पाता है। जिससे फसलों को भी जिंक नहीं मिल पाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए एएमयू एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. शम्स तबरेज खान ने नया शोध किया है। उनका शोध फसलों में जिंक की मात्रा को बढ़ाने को लेकर है। जिसमें उन्होंने सफलता पाई है। पहला शोध उन्होंने आसानी से सभी प्राप्त होने वाली फसल गेंहू पर किया। गेंहू की बीज में उन्होंने जिंक और जैविक मिश्रण को मिलाया। बुआई के बाद 64 दिनों तक फसल की पूरी निगरानी की गई। प्रत्येक स्तर पर फसल में जिंक की जांच की गई। उन्होंने पाया कि एक ओर जहां सामान्य गेंहू में 4.5 मीली ग्राम जिंक प्रतिकिलो था। वहीं उनकी बायो फोर्टिफिकेशन विधि से उगाए गए गेंहू में जिंक की मात्रा 7.79 तक पाई गई।

चूहों पर किया गया ट्रायल
प्रोफेसर ने बताया की जिंक की मात्रा अधिक होना भी सही नहीं है। जिसे चेक करने के लिए इसका ट्रायल चूहों पर किया गया। अलग अलग चूहों को सामान्य और शोध किए गए गेंहू को खिलाया गया। एक ओर जहां सामान्य गेहूं वाले चूहे में जिंक की मात्रा सामान्य रही। तो दूसरी ओर जिंक वाले गेंहू को खाने के बाद चूहे में जिंक की मात्रा बढ़ी हुई नजर आई। प्रोफेसर द्वारा शोध कार्य को पूरा कर लिया गया। इसका प्रकाशन ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध जनरल में होने जा रहा है। इस शोध को एमएचआरडी व स्पार्क द्वारा फंड दिया गया था।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
- कोविड कॉल में इम्यूनिटी बूस्ट के लिए बांटी गई थी जिंक की गोली।
- ज़िंक की कमी से इम्यून सिस्टम कमज़ोर, संक्रमण बढ़ने की आशंका।
- ज़िंक की कमी से बाल झड़ना, नाखूनों में बदलाव, त्वचा पर चकत्ते।
देश में बड़ी आबादी है, जिसे पर्याप्त मात्रा में जिंक नहीं मिल पाता है। क्योंकि उसके पास इतना संसाधन नहीं कि पैसे खर्च कर उसकी पूर्ति कर ले। इसीलिए गेंहू और मूंग की दाल को इस शोध के लिए चुना गया। शोध सफल रहा। जल्द ही जनरल प्रकाशित होगा।
प्रो. डॉ. शम्स तबरेज खान, एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी, एएमयू




