
अलीगढ़। कुलपति प्रो. नईमा खातून ने सर सैयद को परिवर्तनकारी विचारक बताते हुए कहा कि उनकी प्रासंगिकता विश्वविद्यालय के संस्थापक होने की भूमिका से कहीं अधिक व्यापक है। उनका स्थायी योगदान एक समुदाय को इतिहास का मूक दर्शक बने रहने के बजाय उसके निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने के लिए सक्षम बनाना था। उन्होंने एएमयू समुदाय से बौद्धिक खुलेपन, वैज्ञानिक सोच और नैतिक जिम्मेदारी को साथ लेकर सर सैयद की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
शिक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए प्रो. खातून ने स्वतंत्र चिंतन और विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता को सुरक्षित रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्रियां हासिल करना और जानकारी जुटाना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से आलोचनात्मक चिंतन, व्यावहारिक कौशल, चरित्र और समाज में सार्थक योगदान देने की क्षमता विकसित होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को प्रमाणों का आकलन करने, स्थापित धारणाओं पर सवाल उठाने और अपनी कल्पनाशक्ति की सीमाओं को तलाशने के लिए प्रेरित करने की अपील की। कुलपति ने एएमयू की शैक्षणिक प्रतिष्ठा और शोध उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए टाइम्स हायर एजुकेशन की विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में विश्वविद्यालय के विश्व के शीर्ष 800 विश्वविद्यालयों में शामिल होने, यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट की रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच पांचवां स्थान प्राप्त करने, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढांचे में उसकी स्थिति और ए-प्लस मान्यता का उल्लेख किया। उन्होंने एएमयू के 46 वैज्ञानिकों को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत शोधकर्ताओं में स्थान मिलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार, ऑनलाइन शिक्षा और संस्थागत मार्गदर्शन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान को भी रेखांकित किया।
छात्रसंघ चुनाव में भाग लेने का आह्वान
एएमयू कुलपति ने विद्यार्थियों से अनुशासन, बौद्धिक स्वतंत्रता और विनम्रता बनाए रखने और आगामी छात्रसंघ चुनावों में जिम्मेदारी से भाग लेने का आग्रह किया। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक माध्यमों से परे सार्थक जीवन बनाने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया। मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की 150वीं वर्षगांठ निकट आने का उल्लेख करते हुए प्रो. खातून ने कहा कि एएमयू का भविष्य केवल उसके इतिहास से तय नहीं होगा, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि उसके विद्यार्थी कौन-से प्रश्न उठाते हैं, किस प्रकार का ज्ञान सृजित करते हैं, कैसा चरित्र प्रदर्शित करते हैं और समाज की कितनी सेवा करते हैं।
प्रो. नस्र को सर सैयद अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
सर सैयद अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय अमेरिका में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर प्रो. हुसैन नस्र को प्रदान किया गया, जबकि राष्ट्रीय सर सैयद उत्कृष्टता पुरस्कार कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित ख्वाजा एजुकेशनल सोसायटी को उनके योगदान के लिए दिया गया। जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन के प्रोफेसर प्रो. हुसैन नस्र और कर्नाटक के गुलबर्गा स्थित ख्वाजा एजुकेशन सोसायटी की ओर से प्रो. एम.ए. खान ने भी सभा को संबोधित किया।

निबंध प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित
अखिल भारतीय सर सैयद निबंध लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को अंग्रेजी, उर्दू और हिंदी श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। अंग्रेजी श्रेणी में एएमयू की मलीहा इकबाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन की अपूर्वा दत्ता दूसरे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की राजश्री मिश्रा तीसरे स्थान पर रहीं। हिंदी श्रेणी में एएमयू के वीमेन्स कालिज की सलवा फातिमा प्रथम स्थान पर रहीं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के मुशर्रफ परवेज ने दूसरा और एएमयू के वीमेन्स पॉलिटेक्निक की सुभाना रिहान ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। उर्दू श्रेणी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद के मोहम्मद फैजुर रजा प्रथम स्थान पर रहे। एएमयू में उर्दू के पीएचडी शोधार्थी मुनव्वर अली दूसरे और उर्दू के ही पीएचडी शोधार्थी सबी जी तीसरे स्थान पर रहे। इससे पूर्व कुलसचिव प्रो. आसिम जफर ने स्वागत भाषण दिया, जबकि छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एम. अतहर अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शारिक अकील और डॉ. फायजा अब्बासी ने किया।
सर सैयद अकादमी के पुस्तकों का विमोचन
सर सैयद अकादमी की दस पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें सर सैयद्स तफसीर-उल-कुरान के दो खंड, डॉ. असद फैसल फारूकी की सर सैयद की मुतालाती सवानेह, प्रो. अरशद मसूद हाशमी की अलीगढ़ कॉलेज और शीराज, प्रो. सारिका वाष्र्णेय की सर सैयद अहमद खान- चरितमय तहजीब-उल-अखलाक और फिक्र-ओ-नजर के विशेषांकय आतिफ सैयद की अलीगढ़: द सिटी दैट आउटलास्टेड एम्पायर्स, डॉ. शम्स बदायूनी द्वारा संपादित मुतालए हयात-ए-जावेद के एक सौ पच्चीस साल, मजहर सईद की सर सैयद की कहानी, अशआर की जुबानी, डॉ. एम. फिरोज खान और डॉ. शगुफ्ता नियाज द्वारा संपादित सर सैयद अहमद खान, डॉ. राहत अबरार द्वारा संपादित सर सैयद: रवादारी और अमन के अलमबरदार शामिल हैं।





